लेखक- रामदास रोड़
वरिष्ठ सलाहकार- अखिल भारतीय इतिहास संकलन समिति हरियाणा।
लेख के संदर्भ-
महाभारत से पूर्व उपरोक्त 6 ग्रंथों अनुसार द्वापर युग में महार्षि अत्रि की धर्मपत्नी अनुसुय्या से पुत्र चन्द्र जन्मे जिनसे आर्य जाति के चंद्र वंश की उत्पत्ति हुई। राजा चंद्र से 44 पीढ़ी गुजरने पर राजा दिलीप का जन्म हुआ राजा दिलीप के पुत्र राजा प्रदीप हुए , राजा प्रदीप की रानी सुंदरा से 3 पुत्र शांतनु सरदार देवापी, महाबाहु और बालि्हक हुए। राजा शांतनु से 3 पुत्र गांगेय, विचित्रांग, विचित्रवीर्य हुए। सरदार देवापी महाबाहु के पुत्र वीर रूरू हुए । जो रोड वंश के संस्थापक थे । बालि्हक के पुत्र अरूढ हुए जिनसे अरोड़ वंश की उत्पत्ति हुई।
काशीराज में अपनी तीन पुत्रियों अंबा अंबिका अंबालिका के स्वयंवर की योजना बनाई। उसने सभी आर्य राजाओं को अपनी लड़कियों के स्वयंवर का निमंत्रण दिया। गांगेय सेना लेकर काशीराज के राज्य से उसकी तीन लड़कियों का अपहरण कर लाए। बड़ी लड़की अम्बा ने विचित्रांग और विचित्रवीर्य दोनों में से किसी एक को वर मानने से इनकार कर दिया। तब अम्बिका और अम्बालिका की शादी दोनों भाइयों के साथ कर दी। अम्बा सिर्फ गांगेय से शादी करना चाहती थी।
विचित्रांग और विचित्रवीर्य दोनों अनूपदेश के शासक सहस्त्रार्जुन की सेना से लड़ते हुए शहीद हो गए । दोनों राजकुमारियाँ निसंतान विधवा हो गई। ऋषि होत्रवाहन जो अम्बा, अम्बिका, अम्बालिका का नाना था। और उनके शिष्य परशुराम द्वितीय ने भीष्म पर उनसे शादी करने के लिए दबाव डाला, तीनों राजकुमारियों की पुनर्शादी भीष्म के साथ करवाई जाए । भीष्म के इनकार करने पर कुरूओं में सबसे वरिष्ठ सरदार देवासी महाबाहु ने कहा- गांगेय यदि तूने विवाह नहीं किया, और यदि तूने राजगद्दी स्वीकार नहीं की तो कुरूओं के समक्ष एक गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। यदि राजगद्दी पर तुम नहीं बैठते हो तो रिश्ते में सबसे निकट होने के कारण इस पर मेरा अधिकार है। मुझे तो राजगद्दी नहीं चाहिए। लेकिन मेरा जेष्ठ पुत्र वीर रूरू इसको ग्रहण करेगा। वह वीर है । वह एक अच्छा शासक बन सकता है। लेकिन मैं जानता हूं कि वह कुरूओं को संगठित नहीं रख सकेगा ।
हस्तिनापुर को त्यागना और चक्र पूरी नगरी को आबाद करना :- माता सत्यवती जो शांतनु की धर्मपत्नी थी उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि जो शांतनु का वंशज न हो उस पर आश्रित होकर जीना उनको पसंद नहीं, इस पर शांतनु के छोटे भाई सरदार देवापी महाबाहु जो शाही सेना के सेनापति थे क्रोध में आकर हस्तिनापुर को त्याग दिया। और कुरुक्षेत्र के दक्षिण में अदिति वन के मध्य चक्रापुरी नगरी की स्थापना की। और परिवार सहित सरदार देवापी महाबाहु उस नगरी में आबाद हो गया।
हस्तिनापुर में महाकाल का पढ़ना :- दुर्गाचार्य द्वारा लिखित यास्क की निरूक्ति 2/3/1 अनुसार- सरदार देवापी महाबाहु के हस्तिनापुर त्यागते ही वहां 12 वर्ष तक वर्षा न होने पर महाकाल पड़ा । जिसका कारण सरदार देवापी महाबाहु का हस्तिनापुर त्यागना माना गया था। तब उनको मनाने और वापस लाने के लिए भीष्म पितामह चक्रापुरी नगरी गए, किन्तु सरदार देवापी महाबाहु ने हस्तिनापुर जाने से इंकार कर दिया। बहुत आग्रह करने पर उन्होंने राज्य ग्रहण तो नहीं किया परंतु स्वयं पुरोहित बनकर यज्ञ कराया । जिसके बाद वर्षा हुई, चारों तरफ खुशहाली फैल गई।
वीर रूरू द्वारा राज्य का विस्तार :- वीर रूरू जो कुरू शाखा का 48 वां चंद्रवंशी राजा हुआ। वह अपने प्रयत्नों से अनूप देश के राजा सहस्त्रार्जुन की सेना में भर्ती हुआ। सेनापति बना, बाद में चर्णमति (चंबल घाटी) में राज्य स्थापित किया। यह घटना महाभारत से बहुत पहले की है। इस चर्णमति राज्य वर्तमान (चंबल की घाटी) में राज्य को प्रमाणित करने के लिए इंग्लैंड से प्राप्त दो रिपोर्ट पेश की जा रही है।
साक्ष्य 1 - परिशिष्ट 1
Proof 1 -Bhains Ror garh Wikimedia https:#enEngland M Wikipedia. Org :- Bhains ror grah fort is an ancient Fort that has become a major tourist spot in the state of Rajasthan India.
The nearest town is RAWATBHATA 7 K. M. From Bhains Ror Garh is an Campreg able Fort Cnhalitaatd from at least 2nd century B. C. E. It was built by Ror King.
It is dramatically positioned between two Rivers chambal and bamni.
नोट- 2nd BCE अर्थात 2022+200= 2222 वर्ष पूर्व की घटना है।
साक्ष्य-2- परिशिष्ट 2
Pinterest co u. K. ( United kingdom England) Wikimedia. Org - Bhains Ror garh Fort Rajashthan India and in Campreg able Fort near the Shimmering chambal River Cnhalitaatd from the 200 BC-E many Rors Hindu kings in North India were killed by Arab Invaders an the day of the main Hindu religion Diwali festival.
नोट- 200 बी सी एस अर्थात 2022+200=2222 वर्ष पूर्व की घटना है।
*वीर रूरू के परिवार का विस्तार:- श्री हरिवंश पुराण 34 वां अध्याय, पृष्ठ 122 अनुसार डॉक्टर राजपाल सिंह रोड इतिहास की झलक पृष्ठ 93 परिशिष्ट पांच अनुसार राजा रूरू की रानी कलावती जो चमन ऋषि की पुत्री थी। उनसे तालम देवपुत्र का जन्म हुआ। तालम देव की रानी आत्मा देवी जो अन्तल ऋषि की पुत्री थी ।उनसे बत्तीहोत्र पुत्र हुए । और चतरंगा पुत्री हुई।
वीर रूरू की पुत्री चतरंगा का विवाह उन्होंने मथुरा के शासक शूरसेन से कर दिया। शूरसेन की रानी भोजराज कुमारी से वसुदेव, देवभाग, देवश्रवा,अनादृष्टि, कनवक, वात्स्यायन, गुगिल, श्याम और मण्डूस 10 पुत्रों का जन्म हुआ।
उनकी दूसरी रानी चतरंगा से जो वीर रूरू की पोत्री और तालम देव की पुत्री थी। उनसे पृथा, पृथुकीर्ति, श्रुतदेवा, श्रुतर्वा, और राजधि देवी। पांच पुत्रियों ने जन्म लिया। राजा कुंती भोज की कोई संतान नहीं थी। उन्होंने मथुरा के शासक शूरसेन से उनकी पुत्री पृथा को पुत्री रूप में मांग लिया। कुंती भोज की पुत्री होने से पिता का नाम पुत्री के साथ जुड़ने से पृथा से कुंती कहलाई। धर्मराज युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन तीनों कोन्तेय अर्थात कुंती पुत्र कहलाए।
महाभारत में चक्रापुरी नगरी अभिमन्यु पुर अर्थात (अमीन) का महत्व :- इसमें संदेह नहीं कि पूर्व महाभारत चक्रापुरी नगरी के इर्द-गिर्द घूमती दिखाई दे रही है। जब भी कुंती पुत्रों पर संकट के बादल मंडराते वह उनको लेकर चक्रापुरी नगरी की तरफ दौड़ती थी। कुंती पुत्र लाक्षगृह से सुरक्षित निकलने के बाद, सीधे चक्रापुरी नगरी पहुंचे थे। यक्ष युधिष्ठिर संवाद इसी स्थान पर (अमीन) के पूर्व में सूर्य कुंड सरोवर पर हुआ था।
यक्ष अब शिवलिंग रूप में उसी स्थान पर स्थित है। भीम ने हिडिंब को इसी स्थान पर मारा था। भीम हिडिंबा की शादी अमीन गांव के पूर्व में रेलवे लाइन पुल के पास चोरी डाबर में हुई थी। घटोत्कच का जन्म इसी स्थान पर हुआ था । वीर अभिमन्यु इसी स्थान पर शहीद हुए थे। चक्रापुरी नगरी के नाम पर चक्रव्यू इसी स्थान पर रचा गया था। अभिमन्यु के हत्यारे जयद्रथ का वध अमीन बराणी के मध्य के जयद्रथ तालाब पर किया था। इसका मुख्य कारण यह था कुंती पुत्र और कुंती वीर रूरू के नाती थे। महाभारत के बाद चक्रापुरी नगरी का नाम अभिमन्युपुर रखा गया था। बाद में अमीन रख दिया गया था। वर्तमान में फिर अभिमन्युपुर रखा गया है ।
*महाभारत-- रोड गांव अमीन का जुड़ाव निम्नलिखित रिपोर्ट द्वारा समझें --
साक्ष्य नंबर 3 परिशिष्ट 3
Tribels and casts of North Western province and Avdh By W. Crook B. A. Bengal civil services in 4th volume Calcutta office of the superintendent of govt printing India 1896 C. E :- Ror a small cast cultivators in the western district of their Kingsmen in the Punjab Mr ebbetson writes- The real seat of Punjab Rors in in the great DHAK JUNGLE south of Thanesar on the border s of the Karnal and Ambala district. Where they hold a chaurasi, nominally of eighty four village of witch the village of Amin, where the Pandavas arranged their force’s before their last fight with the Kauravas in their Head village.